गुरुवार, 12 जनवरी 2017

एफएम रेडियो बंद करने वाला विश्व का पहला देश बना नार्वे

यूरोप महाद्वीप स्थित नार्वे बना एफएम रेडियो बंद करने वाला विश्व का पहला देश

यूरोप महाद्वीप स्थित नार्वे बना एफएम रेडियो बंद करने वाला विश्व का पहला देश

यूरोप महाद्वीप स्थित नार्वे 11 जनवरी से अपना एफएम रेडियो नेटवर्क बंद कर रहा है। ऐसा करने वाला वह विश्व का पहला देश बन गया है। अपने डिजिटल रेडियो को सपोर्ट करने के लिए उसने ऐसा किया। नार्वे ने अब एफएम की बजाय डिजिटल ऑडियो ब्रॉडकास्टिंग (डैब) तकनीक को अपनाया है। नॉर्वे एफएम की बजाय डिजिटल ऑडियो ब्रॉडकास्टिंग (डैब) तकनीक को अपनाने जा रहा है। नार्वे के अनुसार डिजिटल रेडियो की साउंड क्वालिटी एफएम से ज्यादा अच्छी है और इसकी लागत भी 8 गुना कम है।

क्या होती है डैब तकनीक

यह एक ऐसी तकनीक हैं जिसमें एनालॉग ऑडियो सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में बदला जाता है। इसे ऑडियो की अब तक की सबसे बेहतरीन तकनीक माना जाता है। आपको बता दे नार्वे अगले सप्ताह से पूरी तरह इस, तकनीक को अपनाने जा रहा है। इस तकनीक को अपनाने से 2.35 करोड़ डॉलर की सलाना बचत होगी। नार्वे में 20% निजी कारें ऐसी है जिनमें पहले से डैब रेडियो सिस्टम मौजूद है। एफएम को डैब रेडियो सिस्टम में बदलने में 174.70 डॉलर की लागत आती है।

डीएबी बेहतर कवरेज प्रदान करता है। छूट गए कार्यक्रमों को भी श्रोता सुन सकते हैं। इतना ही नहीं आपात स्थिति में आपात संदेश भी प्रसारित करता है। डिलीटल रेडियोनार्जे के प्रमुख ओले जॉर्गेन टॉर्वमार्क ने कहा, 'इस बड़े तकनीकी बदलाव के पीछे बड़ा अंतर और मुख्य कारण पूरी आबादी को बेहतर रेडियो सेवा उपलब्ध कराना है।' डिजीटल रेडियोनार्जे कंपनी पर सार्वजनिक प्रसारक एनआरके और व्यावसायिक रेडियो स्टेशन पी4 का अधिकार है।

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स्विट्जरलैंड ने एफएम रेडियो को खत्म करने के लिए वर्ष 2020 की समय सीमा तय की है। भारत में एफएम रेडियो की शुरूआत चेन्नई में वर्ष 1977 में हुई थी। यहां सरकार एफएम कंपनियों से एक ही बार प्रवेश शुल्क लेती है। 

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